Daily Schedule
Darshan Timings
दर्शन एवं भोग समय
वर्तमान में इस मंदिर में पूजा अर्चना करने वाले ब्राह्मण हैं पंडित प्रमोहित पाण्डेय
बाल भोग (प्रातःकाल)
विधिपूर्वक पूजन के पश्चात सूखे मेवे, मूँगफली, मिश्री, इलाइची दाना, फल, मिष्ठान्न एवं दूध निर्मित वस्तुएँ भोग के रूप में चढ़ाई जाती हैं। आरती एवं प्रार्थना के बाद भक्तों के बीच प्रसाद वितरित किया जाता है।
महाभोग (दोपहर)
पुजारी परिवार द्वारा पवित्र एवं प्रसन्न भाव से नैवेद्य तैयार किया जाता है — अरवा चावल का भात, दाल, सब्जियाँ और खीर आदि का नैवेध मदन मोहन स्वामी को अर्पित किया जाता है।
बाल भोग (सायंकाल)
सायंकालीन भोग में सूखे मेवे, मूँगफली, मिश्री, इलाइची दाना, फल, मिष्ठान्न एवं दूध निर्मित वस्तुएँ विधिपूर्वक पूजन के पश्चात अर्पित की जाती हैं और प्रसाद रूप में वितरित की जाती हैं।
महाभोग (रात्रि)
भगवान के शयन काल के पूर्व विविध प्रकार के पकवान — पुआ-पूड़ी, दूध-रोटी, खीर-रोटी आदि — अंतिम भोग के रूप में अर्पित किए जाते हैं।
The Sacred Tradition of Bhog
भोग की पवित्र परंपरा
मदन मोहन मंदिर में प्रतिदिन चार बार विधिपूर्वक भोग लगाने की प्रथा है — यह एक जीवित परंपरा है, जिसे पुजारी परिवार एवं आस-पड़ोस के ग्रामवासी पीढ़ियों से निभाते आ रहे हैं।
बाल भोग
सूखे मेवे, मूँगफली, मिश्री, इलाइची दाना, फल, मिष्ठान्न एवं दूध निर्मित वस्तुओं का हल्का सात्विक भोग। विधिपूर्वक पूजन के पश्चात अर्पित किया जाता है और आरती के बाद भक्तों में वितरित किया जाता है।
महाभोग
पुजारी परिवार द्वारा श्रद्धा से तैयार पूर्ण नैवेद्य — दोपहर में अरवा चावल का भात, दाल, सब्जियाँ एवं खीर; रात्रि में भगवान के शयन काल से पूर्व पुआ-पूड़ी, दूध-रोटी एवं खीर-रोटी अर्पित की जाती है।
पूजन व्यवस्था
वंश परंपरा से सेवा
मंदिर में पूजन व्यवस्था लक्ष्मी नारायण तिवारी के वंशजों द्वारा की जाती है, जो पीढ़ियों से मदन मोहन स्वामी की सेवा करते आ रहे हैं।
पारी / बारी व्यवस्था
प्रत्येक परिवार पारी/बारी व्यवस्था से प्रतिबद्ध एवं आबद्ध है। भोग के लिए सभी की तिथि निश्चित है, जिस दिन उक्त परिवार द्वारा नकद राशि या कच्ची सामग्री मंदिर के पुजारी तक पहुँचा दी जाती है।
नवान्न का प्रथम अर्पण
किसी भी प्रकार का नवान्न एवं नई सब्जी मंदिर को प्रथमतः अर्पित कर ही स्वयं उपयोग किया जाता है।
पर्व एवं संस्कार सेवा
त्योहारों या विशिष्ट संस्कारों के अवसर पर प्रत्येक परिवार मंदिर के लिए पकवान बनाकर नैवेद्य रूप में पहुँचाता है, जिसका विधिवत मदन मोहन स्वामी को भोग अर्पित किया जाता है।
Akhanda Aastha
अखण्ड आस्था
बोड़ेया एवं आस-पड़ोस के ग्रामवासी मदन मोहन के अटूट भक्त हैं। इनके प्रति सबकी अखण्ड आस्था है और सभी लोग मदन मोहन को अपने हृदय में बसाये रखते हैं।
“मदन मोहन केवल मंदिर में नहीं, बल्कि बोड़ेया के प्रत्येक भक्त के हृदय में विराजमान हैं।”